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ग़ज़ल

सपने की हकीकत, बयां करते नहीं । टूट जाते हैं इक दिन, बयां करते नहीं ॥ जिन्हें देखा था कि वे हमदम हैं । वे हमदम नहीं, बयां करते नहीं ॥ हसीनों से दोस्ती न कर तू । वे बदल जाती हैं, बयां करती नहीं ॥ ख्वाबों की मल्लिका, ख्वाब ही रहती हैं । इस सच को कहीं, बयां करते नहीं ॥ आदमी है तो उम्मीद तो रक्खेगा ही | उम्मीदें टूट जाती हैं, बयां करते नहीं ॥ कहीं गफ़लत में जीने से अच्छा है । जी जिंदगी ऐसे ही, बयां करते नहीं ॥

हिसाब किताब

स्त्रियाँ कहती हैं- तुम जाओ । इतना बेवकूफ नहीं हो कि मेरी भाषा समझ नहीं रहे हो । वे गुस्सा करेंगी, चिड़चिड़ापन लिए रहेंगी, सामान्य बात को जोर से कहेंगी । मतलब तुम चले जाओ मेरी जिंदगी से यानी रिश्ता खत्म । लेकिन वे अपनी बात आपके मुँह से उगलवाएँगी । हर बार आपको घेरेंगी, गलत ठहराएँगी और आपको माफी के हद तक गिरा देंगी । क्योंकि वे प्रेम में हैं । उनकी अधिकांश जिंदगी इसी खेल में बीत जाता है । इसमें जीतना उन्हें सुकून देता है । इसमें अधिक बार पुरुष छले जाते हैं । और कई बार स्त्री भी । जहाँ आकर्षपण, शोहरत और पैसे की भूख है वहाँ स्त्री छली जाती है और जहां प्रेम रहता है, वहाँ पुरुष ।  पुरुषों की कमी है कि वह अपनी पसंद की स्त्री के साथ हर स्थिति में रहना चाहता है । कुछ स्त्रियां भी ऐसी हैं। किंतु सभी नहीं । बहुत कम स्त्रियां हैं जो अपने रिश्ते के साथ लंबे समय तक बनी रहती हैं । इस टिप्पणी पर स्त्रियों की टिप्पणी अपेक्षित है । उनकी टिप्पणी बिना यह टिप्पणी अधूरी है । जब वह सीधे कहती हैं तबतक बहुत समय निकल चुका रहता है । पुरुष पीछा रह जाता है और स्त्री आगे चली जाती है । कुछ की मजबूरियां रहती हैं,...

क्या मेरी कुछ ऐसी गलतियां रही हैं जो माफी लायक नहीं है

जैसे भी हो, अब आप खुश होकर जीजिए । अब मैं कुछ भी नहीं बोलूँगा ।  अब मेरी न कोई आशा है, न कोई ख्वाब, न कोई चाह । मुझे अपनी सीमाएँ मालूम थी । ईश्वर से बड़ा कोई नहीं । जाइए, मगर सजा देकर नहीं । लगता है मैं कौन बड़ा पाप कर दिया । जानता कि आपको छुने की इतनी बड़ी सजा मिलेगी । मैं कभी नहीं छुता ।  इतना कोई निष्ठुरता से जाता है ? आपको क्या मालूम आपको देखने मात्र से मुझे कितनी खुशी मिलती थी । सारा संसार जी लेता था । चले जाइए मुझसे दूर । मेरा सबकुछ सूना करके । क्या पढी हैं कि मेरी आत्मा को नहीं पढ़ पाई ? मैंने आपको पढा- मैंने सीमाएँ नहीं लांघी ।मेरी आत्मा कभी नहीं धिक्कारेगी कि मैंने आपको सम्मान नहीं दिया । मेरी आत्मा आपके कदमों की धूल की भूखी थी । ऊपर से दिखने वाली मेरी जिद्दें जिद्द नहीं थीं । आपके प्रेम के आगे सब निष्फल थे । जैसे आप मुझे बचाना चाहती थी मैं भी आपको बचा रहा था ।

रिश्ता का टूटना किसी मृत्यु से कम नहीं

किसी रिश्ते का टूटना मृत्यु के समान है ! मेरी जिंदगी से आपका जाना, मुझे सबसे ज्यादा कमजोर बना दिया । आप मेरे उत्साह थे । जीवन थे । आज मेरा उत्साह चला गया । आपने अपना दिल का बोझ हल्का कर लिया । मैंने कभी नहीं समझा कि दूर जाएँगी । आप मुझसे दिखावा के लिए प्यार किए । आज मेरा सपना मर गया । आप मेरी हँसी, मेरा गर्व छीन लिए । पटना की गलियों में अब कभी हँसते हुए नहीं आऊँगा । आप मेरे लिए पूरी पटना थीं । मेरे सर की ताज़ । आपने बहुत सरलता से कह दिया, और मैं सुन भी लिया । शायद आप कोई जल्दीबाजी में निर्णय ले रहे हैं या किसी बहकावे में मुझे नहीं पाता । जब आप कमजोर होइएगा, हरेराम सिंह आपकी आत्मा के साथ खड़ा दिखेगा । एक सितारा की तरह, एक नक्षत्र की तरह । माँ कसम, मुझे कभी प्यार नहीं मिला, इसका मुझे मलाल रहेगा । मरते वक्त भी आप याद आएंगी । आपसे उम्मीद थी वह भी चला गया । आपको सच नहीं बोलना चाहिए था । इतने दिन में कितना कुछ ख्वाब देख लिया था । मुझे यकीन हो गया था कि आप मेरे जीवन को पार लगा देंगी । आज मैं पूरी तरह हार गया। शायद एक सुंदर पौधा सूख जाएगा । गंभीर व्यक्ति का प्रेम ❤️गहरा होता है । आपको अपनी बे...

उस दिन

मैं आपको सुन सकता हूँ । आपको समझ सकता हूँ ।  अपने दुःखों को ताक पर रखकर, समझौता कर सकता हूँ क्योंकि आपसे प्रेम करता हूँ । पर जिस दिन दुनिया आपकी न ही सुनेगी, न ही समझेगी उस दिन आपको लगेगा यह लड़का न सिर्फ मेरी सोच के करीब था; बल्कि दिल के भी करीब था । मुझे एक झलक पाने के लिए महीनों और कभी अंदर - अंदर वर्षों तड़पा करता था , रोया करता था , भगवान से मिन्नते मांगा करता था, उसकी हरकत बचकानी नहीं थी, उसका प्रेम था । शायद उसकी जिंदगी में प्रेम का अभाव था, आया था मुझसे प्रेम मांगने ।  और तो और उसे ही मालूम थी - टाइम, प्रेम और आदमी की वैल्यू । वह यह भी कि उसकी आँखों में पानी जरूर था । पर, वह न कमजोर था, न बहुत गरीब । वह कमजोर, भावुक , भीखेरा इसलिए था; क्योंकि वह मुझसे प्रेम कर बैठा था ...!!! वह साल में दो- तीन अच्छी मुलाकातें मांगता था जिसे वह गर्व के साथ प्रेम कह सके । वह डटकर अपनी जिम्मेवारियों को निभा भी रहा था । बस, कुछ अभाव थे उसकी जिंदगी में... जिसे पूरा कर रहा था वह मेरी आँखों में देखकर ।  आपको हैरत होगा एक दिन कि क्या मुझमें उसे दिख गया था कि वह मेरे लिए पागल था....!!!

जी रहा हूँ

आपको जी रहा हूं मन के स्तर पर हृदय के स्तर पर .......... .......... आगे डर भी लगता है आप कहीं दूर न जाएँ ......... कुछ नहीं.... 🌹♥️ I love 💕 you!!! हे माँ ! मेरे जीवन को सरल बना दे । मैं किसी को कष्ट नहीं देना चाहता । लेकिन, माँ कभी- कभी ऐसा लगता है कि मैं कितना अभागा हूँ । मेरे अभ्यांतर को कभी- कभी इतना कष्ट क्यों देती हो माँ ! माँ, क्या मैं सचमुच गलत हूँ ? क्या मैं अपने जीवन में किनारा नहीं पाऊँगा ? मुझे किनारा दो माँ ! मुझसे असीम धैर्य, आँखों में प्रतीक्षा और हृदय में कभी रिक्त न होने वाला प्रेम में दो । .... कुछ सजा भी । देर रात मुझे नींद नहीं आ रही.... ये आँख के आँसू सूख- सा गए ... निकल भी नहीं रहे हैं... कि जी हल्का हो जाए । इस दुनिया को जीतकर क्या करूँगा? सबकुछ मिलेगा, पर आप नहीं मिलोगे । जब दिल आपको खोजता है तो यह सुनहरी दुनिया फीकी लगती है । पाँच मिनट की मुलाकात भी सुकून दे जाती । पर वह भी नहीं । जहाँ स्वीकार्य है वहाँ गलत नहीं है । जहाँ अस्वीकार्य है वहाँ गलत ही गलत है । लेकिन यह गलत सही पूर्णतः आप लड़कियों पर निर्भर करता है । यदि प्रेम में लड़की का पक्ष इंकार का है तो लड़क...

शुद्ध हिन्दी

हिन्दी लिखने वाले अक़्सर 'ई' और 'यी' में, 'ए' और 'ये' में और 'ऐं' और 'यें' में जाने-अनजाने गड़बड़ करते हैं। कहाँ क्या इस्तेमाल होगा, इसका ठीक-ठीक ज्ञान होना चाहिए...। जिन शब्दों के अन्त में 'ई' आता है वे संज्ञाएँ होती हैं क्रियाएँ नहीं, जैसे: मिठाई, मलाई, सिंचाई, ढिठाई, बुनाई, सिलाई, कढ़ाई, निराई, गुणाई, लुगाई, लगाई-बुझाई...। इसलिए 'तुमने मुझे पिक्चर दिखाई' में 'दिखाई' ग़लत है... इसकी जगह 'दिखायी' का प्रयोग किया जाना चाहिए...।  इसी तरह कई लोग 'नयी' को 'नई' लिखते हैं...।  'नई' ग़लत है, सही शब्द 'नयी' है...  मूल शब्द 'नया' है, उससे 'नयी' बनेगा...। क्या तुमने क्वेश्चन-पेपर से आंसरशीट मिलायी...? ('मिलाई' ग़लत है...।) आज उसने मेरी मम्मी से मिलने की इच्छा जतायी...। ('जताई' ग़लत है...।) उसने बर्थडे-गिफ़्ट के रूप में नयी साड़ी पायी...। ('पाई' ग़लत है...।) अब आइए 'ए' और 'ये' के प्रयोग पर...। बच्चों ने प्रतियोगिता के दौरान सुन्दर चित्र बनाय...