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Showing posts from May, 2022

डॉ.हरेराम सिंह, कवि-आलोचक

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ख्यातिप्राप्त कवि व आलोचक डॉ. हरेराम सिंह का सामान्य परिचय व उनकी प्रकाशित कृतियां: जन्म :  30जनवरी 1988 ई.को, बिहार के रोहतास जिला अन्तर्गत काराकाट प्रखंड के करुप ईंगलिश गाँव में। शिक्षा : एम.ए.(हिंदी), यू.जी.सी-नेट, पीएच.डी.| आलोचना-ग्रंथ:  १. ओबीसी साहित्य का दार्शनिक आधार, 2015 २. डॉ.ललन प्रसाद सिंह:जीवन और साहित्य, 2016 ३. हिंदी आलोचना का बहुजन दृष्टिकोण, 2016 ४.  हिंदी आलोचना का प्रगतिशील पक्ष , 2017 ५. हिंदी आलोचना का जनपक्ष , 2019 ६. डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह की वैचारिकी, संस्मरण एवं साक्षात्कार , 2019 ७. आधुनिक हिंदी साहित्य और जन संवेदनाएँ , 2021 ८.  किसान जीवन की महागाथा : गोदान और छमाण आठगुंठ , 2021 ९. समकालीन सच:संदर्भ साहित्य और समाज, 2021 १०. डॉ.ललन प्रसाद सिंह का जीवन, दर्शन तथा लेखन,2021 कविता-संग्रह:  ११. हाशिए का चाँद , 2017 १२. रात गहरा गई है !, 2019 १३. पहाडों के बीच से , 2019 १४.  मैं रक्तबीज हूँ !, 2019  १५. चाँद के पार आदमी , 2019 १६. रोहतासगढ़ के पहाड़ी बच्चे, 2019 १७. रात के आखिरी पहर तक , 2020 १८. नीम की पत्तियों से उतरती चाँदनी , 2020 १९.  मुक्ति के गीत , 202

कहाँ खड़े हो मेरे राजकुमार

कहाँ खड़े हो मेरे राजकुमार ..... लंपट समय में लंपट लोगों के साथ खड़ा होने पर विवश है हमारे युग की नई पीढ़ी और हम हैं कि टुकुर-टुकुर ताक रहे हैं! ऐसा नहीं है कि ये लंपट लोग इस युग से पहले कभी दिखाई ही नहीं दिए और तत्कालीन ऊर्जा को कालनेमि बनकर भटकाए नहीं ! इधर का दौर कुछ ज्यादा ही खतरनाक हो चुका है रूस-यूक्रेन युद्ध से भी ज्यादा अमेरिका विश्व पटल पर ऐसा उतर रहा है जैसे उसने कोई पाप किया ही नहीं है लोग नागासाकी और हिरोशिमा को भूल गए, या भूलना उनकी मजबूरी बन गई है? चाहे युद्ध कोई लड़े, सुनाई देती है मानवता की चित्कार ही! पर, यह सुनने वाला कौन बचा हैं? आज गाँव का बच्चा-बच्चा फेसबुक, ट्वीटर, वाट्सएप और इंस्टाग्राम पर सक्रिय है और इस नई उपलब्धि के गुमान में वह इतना इतरा गया है कि भूख-प्यास की उसे चिंता नहीं  अधकचरी सामग्री को ही प्रमाणिक आधार मान हुल्लड़ मचा रहा है कश्मीर फाईल के पहले भी कई फाइलें दब गईं  और बाद की कई फाइलें दब जाएंगी महिलाओं के साथ बलात्कार और कमजोरों की जमीन कब्जाने की प्रक्रिया आज भी अबाध गति से चलती चली जा रही है और मेरे गाँव का राजकुमार किताब छोड़ फेसबुक पर पलटिया मारने